अध्याय 163

समर की नज़र से

उसका हाथ उठा और उसने मेरे चेहरे को अपनी हथेली में थाम लिया। उसकी हथेली मेरे गाल से लगी तो गर्माहट सी फैल गई, और उसका अंगूठा उन आँसुओं को पोंछता रहा जो रुक ही नहीं रहे थे। उसका छूना इतना मुलायम था कि दिल में कसक उठी—जैसे मेरे भीतर कुछ मरोड़ा, टूट गया, और फिर किसी ऐसे रूप में जुड़ ...

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